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  • बवासीर के लक्षण व घरेलु-आयुर्वेदिक उपचार

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    • 25 Feb,2021 04:23 PM
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    क्या है बवासीर 

    बवासीर या पाइल्स एक ऐसी बीमारी है जिसमें एनस के अंदर और बाहरी हिस्से की शिराओं में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अंदरूनी हिस्से में या बाहर के हिस्से में कुछ मस्से जैसे बन जाते हैं, जिनमें से कई बार खून निकलता है और दर्द भी होता है। कभी-कभी जोर लगाने पर ये मस्से बाहर की ओर आ जाते है। अगर परिवार में किसी को ऐसी समस्या रही है तो आगे की जेनरेशन में भी इसके पाए जाने की आशंका बनी रहती है।

    कई बार अगर किसी व्यक्ति में लम्बे समय तक कब्ज होती है और मल त्याग के दौरान व्यक्ति को अतिरिक्त दबाव देना पड़ता है। ऐसे में मलाशय और एनल कैनल के भीतर रक्तवाहिकाओं पर दबाव बढ़ जाता है और उन्हें सूजन या दर्द होता है। 

    बवासीर के लक्षण

    मल त्याग करते वक्त खून आना या म्यूकस का आना
    एनस के आसपास सूजन या गांठ सी महसूस होना
    एनस के आसपास खुजली का होना
    मल त्याग करते वक्त बहुत ज्यादा दर्द का महसूस होना।
    मल त्याग करने के बाद भी ऐसा लगते रहना जैसे पेट साफ न हुआ हो
    पाइल्स के मस्सों में सिर्फ खून आता है, दर्द नहीं होता, अगर दर्द है तो इसकी वजह है इंफेक्शन

     

    बवासीर के कारण

    कब्ज पाइल्स की सबसे बड़ी वजह है। कब्ज होने की वजह से कई बार मल त्याग करते समय जोर लगाना पड़ता है और इसकी वजह से पाइल्स की शिकायत हो जाती है। 
    ऐसे लोग जिनका काम बहुत ज्यादा देर तक खड़े रहने का होता है, उन्हें पाइल्स की समस्या हो सकती है। 
    गुदा मैथुन करने से भी पाइल्स की समस्या हो सकती है। 
    मोटापा इसकी एक और अहम वजह है। 
    कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान भी पाइल्स की समस्या हो सकती है। नॉर्मल डिलिवरी के बाद भी पाइल्स की समस्या हो सकती है।

    बवासीर में क्या न खाएं और क्या खाएं

    हमारे खानपान और हेल्थ का आपस में गहरा नाता है। आप जो भी खाते हैं, उसका सीधा प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए हेल्दी रहने के लिए खानपान पर खासा ध्यान देने की सलाह दी जाती है। कई बार कुछ फूड आइटम्स जहां एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाते हैं, वहीं दूसरे व्यक्ति के लिए वह नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। हर किसी को एक ही तरह के खान-पान सूट नहीं करते। तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसे फूड आइटम्स के बारे में बता रहे हैं, जो बवासीर के मरीजों के लिए उचित नहीं माने जाते।

    फाइबर खाएं: इसे प्राप्त करने का अच्छा तरीका पौधे से है - सब्जियां, बीन्स, नट्स, जैविक उत्पाद, बीन्स, साबुत अनाज, बीज

    पानी पिएं: यह आपको कठोर मल और ठहराव से एक रणनीतिक दूरी बनाए रखने में सक्षम करता है, इसलिए आप ठोस निर्वहन के दौरान कम तनाव में हो सकते हैं। 

    मिट्टी के उत्पाद, जिनमें फाइबर होते हैं, इसके अतिरिक्त उनमें पानी होता है।

    व्यायाम: शारीरिक क्रिया, जैसे लगातार आधे घंटे टहलना, आपके रक्त और आपकी हिम्मत को बनाए रखने के लिए दूसरा तरीका है।

    बवासीर में मसालेदार भोजन खाना चाहिए या नहीं

    हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बवासीर की समस्या होने पर व्यक्ति को मसालेदान भोजन का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। स्पाइसी फूड ना सिर्फ सूजन बल्कि दर्द को भी बढ़ाने का काम करते हैं। 

    बहुत अधिक चीज़

    आपको शायद पता ना हो लेकिन बहुत अधिक चीज़ का सेवन भी आपकी समस्या को बढ़ा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कभी−कभी चीज़ सैंडविच या फिर पिज्जा का सेवन करना आपके लिए नुकसानदायक नहीं होगा, लेकिन बहुत अधिक चीज़ के सेवन से बचना चाहिए।


    बवासीर में मीट खाना चाहिए या नहीं
    अगर आप नॉन वेजिटेरियन हैं तो मीट का सेवन भी आपकी बवासीर की परेशानी को बढ़ा सकता है। खासतौर से, रेड मीट को डाइजेस्ट करना इतना आसान नहीं होता। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि आप अपने मल में खून देख रहे हैं और लगातार कब्ज़ महसूस करते हैं, तो कुछ समय के लिए शाकाहारी भोजन की तरफ स्विच करें।

    प्रोसेस्ड और डीप फ्राइड फूड

    बहुत से लोगों के पास इतना समय नहीं होता कि वह किचन में लंबा वक्त बिता सकें। ऐसे में अधिकतर लोग पैकेज्ड या प्रोसेस्ड फूड का सेवन अधिक करते हैं। चिकित्सकों के अनुसार यदि आपको बवासीर की समस्या है तो आपको प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए। इसके अलावा डीप फ्राइड फूड का सेवन भी आपको काफी परेशान करेगा।

    कैफीन

    कैफीन का अत्यधिक सेवन भी बवासीर रोगियों के लिए उचित नहीं माना जाता। डॉक्टरों के अनुसार, कैफीन पेट की जलन और निर्जलीकरण की वजह बनता है। इसलिए अगर आपको दिन में चार से छह कप चाय−कॉफी पीने की आदत है तो बेहतर होगा कि आप अपनी रेग्युलर चाय को ग्रीन टी से स्विच करें।

    बवासीर के इलाज के लिए नॉन-सर्जिकल तरीके

    व्यायाम करना।
    उचित आहार का पालन करना।
    स्टूल सॉफ्टनर का उपयोग करना।
    वार्म सिट्ज बाथ लेना।
    क्रीम, मलहम और सपोसिटरी।

    बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज 

    थेरेपी 
    अभ्‍यंग 

    बवासीर के आयुर्वेदिक इलाज में इस आयुर्वेदिक थेरेपी के अंतर्गत औषधीय तेल से शरीर का उपचार किया जाता है। इसमें बवासीर का कारण बने वात को बैलेंस किया जाता है।

    सिट्ज बाथ 

    सिट्ज बाथ से बवासीर के लक्षण जैसे-दर्द, खुजली और अन्‍य गुदा से संबंधित लक्षणों में राहत मिलती है। ये गुदा और जननांग के हिस्‍से को साफ करता है और आराम देता है और इस हिस्‍से में रक्‍त प्रवाह को बढ़ाता है। इस आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट में 10 से 20 मिनट का समय लगता है।

    बस्‍ती 

    इस आयुर्वेदिक थेरिपी में हर्बल सस्‍पेंशन को एनस के जरिए डाला जाता है। यह आयुर्वेदिक थेरिपी बवासीर के इलाज में बेहद प्रभावी है। बवासीर का यह आयुर्वेदिक उपचार हर उम्र के व्‍यक्‍ति के लिए सेफ है। 

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