कोरोना महामारी के बीच अब मंकी पॉक्स रोग ने दस्तक दे दी है. यह जानवरों से फैलने वाला ऐसा खतरनाक वायरस है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को तेजी से अपनी चपेट में लेता है. इस गंभीर वायरस से बचने के लिए कई राज्यों की सरकारों ने गाइडलाइंस भी जारी की है. बता दें, अभी तक यूरोप और अफ्रीकी देशों से इसके भारी मात्रा में केस आ गए हैं.
एक्सपर्ट अनुसार, अगर यह खतरनाक वायरस फैल गया तो फिर से कोरोना महामारी के फैलने जैसी हालत हो सकती है. इस गंभीर वायरस की मुख्य चार स्टेज बताई गई है, जिनमें अलग-अलग लक्षण दिखाई देते हैं. चलिए हम आपको इस आर्टिकल में मंकी पॉक्स वायरस के इन चरणों के बारे में विस्तार से बताते हैं...
मंकी पॉक्स रोग का पहला चरण-
इस रोग की पहली स्टेज पर संक्रमित व्यक्ति लक्षण महसूस करने लगता है. ये लक्षण उसके अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़े होते हैं. ये ज्यादातर बुखार जैसे लगते हैं. इस चरण में व्यक्ति को बुखार, शरीर में दर्द, थकान व कमजोरी महसूस होती है.
मंकी पॉक्स रोग का दूसरा चरण-
इस रोग की दूसरी स्टेज पर बुखार जैसे लक्षण तो शरीर में दिखाई देते ही है, इसके अलावा त्वचा पर कुछ गांठ दिखाई देने लगती है.
मंकी पॉक्स रोग का तीसरा चरण-
इस स्टेज पर पहुंच कर लिम्फैडेनोपैथी रोगी के हाथों, पैरों, चेहरे, मुंह व प्राइवेट पार्ट्स पर होने वाले दानों या चकत्ते में बदल सकती है।
मंकी पॉक्स का चौथा चरण-
मंकी पॉक्स के चौथे चरण यानि आखिरी स्टेज पर पहुंच कर ये चकत्ते व दाने और भी उभरकर बड़े दानों में बदल जाते हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे पस्ट्यूल में बदल जाते हैं जिनमें मवाद से भरे होते हैं.
ये हैं मंकी पॉक्स के लक्षण
-तेज बुखार
-त्वचा पर चकत्ते
-सिरदर्द
-मांसपेशियों में दर्द
-थकावट
-गले में खराश और खांसी
-आंख में दर्द या धुंधला दिखना
-सांस लेने में कठिनाई
-सीने में दर्द
-पेशाब में कमी
-बार-बार बेहोश होना
-दौरे पडऩा
क्या कहता है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO)?
डब्लूएचओ के अनुसार, मंकी पॉक्स चेचक की तरह फैलने वाला वायरस है. इस रोग की तरह ही मंकी पॉक्स के हल्के लक्षण नजर आते हैं. मगर यह सबसे पहले जानवरों से इंसान में फैलती है. फिर एक व्यक्ति से व्यक्तियों तक पहुंचती है. भले ही यह रोग लंबे समय तक नहीं रहता है. मगर फिर भी इसे हल्के में लेने की भूल नहीं करनी चाहिए. एक्सपर्ट अनुसार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक इस वायरस के फैलने का खतरा 21 दिनों तक रहता है. इसलिए शरीर में इसके लक्षण नजर आने व महसूस होने पर तुरंत खुद को आइसोलेट कर लें. साथ ही समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहिए.