Hindi News Relationship Parents Alert! बच्चों का मोटापा बन सकता है नई महामारी, जानिए कारण व बचने के उपाय 
  • Parents Alert! बच्चों का मोटापा बन सकता है नई महामारी, जानिए कारण व बचने के उपाय 

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    • 03 Aug,2022 05:31 PM
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  • मोटापा दुनियाभर के लोगों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। जहां पहले इससे व्यस्क (adult) परेशान थे। वहीं अपने छोटे बच्चे भी इसका तेजी से शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जल्दी ही इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह नई महामारी का रूप ले लेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वभर में 3.8 करोड़ केवल 5 साल से कम उम्र के बच्चे ही मोटापे से पीड़ित है। बात भारत की करें तो 1.8 करोड़ से ज्यादा बच्चे ही अधिक वजन वाले हैं। साथ ही यह गिनती तेजी से बढ़ती जा रही है। बता दें, भारत पहले से ही व्यस्कों में मोटापे को लेकर दुनिया के 5 देशों में शामिल है। एक रिपोर्ट अनुसार, 2016 में13.5 करोड़ भारतीय मोटे हैं। एक्सपर्ट अनुसार, इस बढ़ते वजन के कारण कम उम्र में ही टाइप 2 डायबिटीज, किडनी, लिवर, कैंसर आदि बीमारियां हो सकती है। ऐसे में समय रहते ही इसपर ध्यान देने की जरूरत है। 

    2.7 करोड़ बच्चे मोटे की संभावना

    यूनिसेफ के वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस unisafe world obesity atlas) के मुताबिक, सिर्फ भारत देश में ही 2030 तक 2.7 करोड़ बच्चे मोटापे की चपेट में आ सकते हैं। इसका मतलब है कि दुनियाभर में हर 10 में 1 बच्चा भारत का ही होगा। दूसरी ओर अधिक वजन के कारण होने वाला आर्थिक प्रभाव जो 2012 में करीब 23 अरब डॉलर था, वहीं 2060 में बढ़कर 479 अरब डॉलर हो सकता है। 

    मोटापे के कारण विश्वभर में करीब 28 लाख मौतें

    राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 2015-2016 में करीब 2.1 फीसदी बच्चे मोटापे के शिकार थे जो 5 साल से कम उम्र के थे। वहीं यह 2019-2021 में यह आंकड़ा कम होने की जगह बढ़कर 3.4 फीसदी हो गया। भले ही भारत की जनसंख्या की तुलना में यह संख्या आपको कम लग रही होगी लेकिन आपको बता दें, कि पिछले साल मोटापे से पीड़ित 28 लाख लोगों को मौत का मुंह देखना पड़ा। 

    मोटापे के कारण इन बीमारियों का हो सकते हैं शिकार

    एक्सपर्ट अनुसार, बच्चों में मोटापा नहीं रोका गया तो वे बड़े होकर मोटे व्यस्क बनेंगे, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंत का विषय हैं। शरीर में जमा वसा से टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर, लिवर, किडनी आदि से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती है। इसके कारण व्यक्ति की समय से पहले यानि कम उम्र में मौत होने का खतरा है। 

    पोषण संबंधी अज्ञानता एक बड़ा कारण

    कोरोना महामारी के सिर्फ 1 साल में ही बच्चों में 2 फीसदी मोटापा बढ़ गया। इसके पीछे कारण पूरा दिन घर पर बैठे रहना व जंक फूड का सेवन करना। इसके अलावा खाने में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी वजन तेजी से बढ़ता है। एक्सपर्ट अनुसार, अगर खाने में विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, हरी-पत्तेदार सब्जियां, डेयरी प्रोडक्ट्स (dairy products) साबुत अनाज, फल आदि शामिल किए जाए तो कुपोषण और अतिकुपोषण दोनों स्थितियों को रोका जा सकता है। साथ ही वजन कंट्रोल रखा जा सकता है। वहीं अगर आप अपनी सेहत के लिए क्या सही है यह नहीं जानते तो आप बस पेट भर रहे हैं। दूसरी ओर शारीरिक फिटनेस पर ध्यान न देना भी एक बड़ा कारण है। बात देश की करें तो हमारे यहां पर कोई फुटपाथ व सुरक्षित साइकिल ट्रैक नहीं है। बस कुछ खेल के मैदान बने हुए है। करीब 2,54,000 बच्चों पर किए सर्वेक्षण में पाया गया कि 2 में से 1 स्वस्थ बीएमआई (BMI) नहीं था। 


    चलिए अब जानते हैं बच्चों में बढ़ रहे मोटापे का कारण...

    . बच्चों का लंबे समय तक फोन, लैपटॉप आदि से चिपके रहना। इसके कारण उनकी शारीरिक गतिविधियां ना हो पाना
    . देर से सोना व जागना। इसके कारण अनियमित समय में भोजन करना
    . आज के समय में ज्यादा से ज्यादा बच्चे जंक फूड का सेवन करते हैं। इससे शरीर को पूरा पोषण नहीं मिलता और वजन बढ़ता है। 
    . योगा, एक्सरसाइज, खेल-कूद में कम दिलचस्पी रखना
    . अच्छी सेहत के प्रतिजागरूक ना होना
    . सही व गलत की पहचान ना होना। इसके कारण बच्चे हैल्दी की जगह अनहैल्दी चीजें खाना पसंद करते हैं।

    ऐसे करें बच्चों का वजन कंट्रोल 

    सबसे पहले आपको बता दें, कि मोटापे से निपटने के लिए तैयारियों के मामले में करीब 183 देशों की गिनती में भारत देश 99 वें स्थान पर आता है। चलिए जानते हैं बच्चे का मोटापा कंट्रोल करने के कुछ उपाय...

    . बच्चे को सेहत के प्रति जागरूक करें। उसे पौष्टिक व संतुलित आहार खाने को प्रेरित करें। 
    . जंक फूड व सॉफ्ट ड्रिंक्स से बच्चों को दूर रखें। 
    . रोजाना बच्चों को पार्क ले जाएं। वहां वे खेल खेलकर व अन्य शारीरिक गतिविधियां करके फिट हो सकते हैं। 
    . बच्चे को समय पर सोने व जागने की आदत डालें। 
    . उनमें सकारात्मक सोच (positive thinking) डालें। 
    . उन्हें सभी से अच्छे व मजबूत रिश्ते बनाने की सीख दें। 
    . बच्चों को फोन व अन्य इलैक्ट्रॉनिक चीजों का इस्तेमाल कम व ना मात्रा ही करने दें।

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